Thursday, August 30, 2018

आज की पांच बड़ी ख़बरें: वरवर राव की बेटी से पुणे पुलिस ने पूछा, 'आपने सिंदूर क्यों नहीं लगाया'

आपके पति दलित हैं, इसलिए वो किसी परंपरा का पालन नहीं करते हैं. लेकिन आप तो ब्राह्मण हैं. फिर आपने कोई गहना या सिंदूर क्यों नहीं लगाया है? आपने एक पारंपरिक गृहिणी की तरह कपड़े क्यों नहीं पहने हैं? क्या बेटी को भी पिता की तरह होना ज़रूरी है?''
ये वो सवाल हैं
भारतीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फ़ोंस का कहना है कि बलात्कार, मॉब लिंचिंग और बीफ़ पर पाबंदी जैसी घटनाओं से देश में विदेशी सैलानियों की आवाजाही पर कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता. किया कि इन घटनाओं से बाहर की दुनिया में देश की छवि धूमिल होती है.
अल्फोंस इस वक़्त चीन के दौरे पर हैं और चीनी पर्यटक दूसरे देशों के मुकाबले भारत बहुत कम संख्या में आते हैं.
बीफ़ पर पाबंदी के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ा मसला नहीं है क्योंकि केरल और उत्तर-पूर्वी राज्यों के शहरों में यह आसानी से मिल जाता है.
एक चीनी पत्रकार के यह पूछने पर कि भारत सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कर रही है, अल्फ़ोंस ने कहा कि 'सरकार इस मुद्दे पर ख़ास ध्यान देती है और इसके मद्देनज़र बहुत-सी कोशिशें की गई हैं.'
बाद में भारतीय पत्रकारों से बात करते हुए अल्फोंस ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में 'ग़लत और पूर्वाग्रह पूर्ण' मीडिया रिपोर्ट्स ज़्यादा बड़ी चुनौती हैं.मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि राहुल गांधी या कांग्रेस के किसी और नेता के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं उठता है.
अगले महीने आरएएस के व्याख्यानों की श्रृंखला शुरू होने वाली है. इस बीच ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि संघ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इसमें आने का न्योता भेज सकता है.
खड़गे ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "पहले निमंत्रण पत्र आने दीजिए. यह निमंत्रण चुनावों को देखते हुए है."नोटबंदी के बाद 500 और 1,000 के 99.3 प्रतिशत नोट बैंकों में वापस आ गए.
आरबीआई की इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए पूछा है कि आख़िर काला धन कहां है.
पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ने नोटबंदी की बड़ी क़ीमत चुकाई है. जीडीपी को 1.5% का झटका लगा और एक साल में 2.25 लाख करोड़ का घाटा हुआ.
जो पुणे पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ़्तार किए गए ऐक्टिविस्ट वरवर राव की बेटी से कथित तौर पर पूछे. पुलिस ने वरवर राव की बेटी और दामाद के घर पर भी छापे मारे थे.
वरवर राव के दामाद के. सत्यनारायण का कहा, ''आपके घर में इतनी किताबें क्यों है? क्या ये आप सारी किताबें पढ़ते हैं? आप इतनी किताबें क्यों पढ़ते हैं? आप मार्क्स और माओ के बारे में किताबें क्यों पढ़ते हैं? आपके घर में फ़ुले और आंबेडकर की तस्वीरें हैं लेकिन देवी-देवताओं की क्यों नहीं?"
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास को फिर से शुरू करने का कोई कारण नहीं दिखता है. लेकिन उनके रक्षा सचिव जेम्स मैटिस ने इस हफ़्ते की शुरूआत में संकेत दिया था कि युद्ध अभ्यास फिर से शुरू हो सकता है.
प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम पर अमरीका और उत्तरी कोरिया के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है. लेकिन ट्रम्प ने ट्वीट किया है कि उत्तर कोरिया के नेता, किम जोंग-उन के साथ उनके रिश्ते सहज हैं. उन्होंने कहा कि सैन्य अभ्यास बहाल करने के लिए ज़्यादा पैसे ख़र्च करने का कोई मतलब नहीं था.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की कि वह दो महीने पहले सिंगापुर में किम जोंग-उन के साथ हुए अपने शिखर सम्मेलन के बाद सद्भावना के संकेत के रूप में सैन्य अभ्यास रद्द कर रहे हैं.
उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी पत्नी से 'अपमानजनक और मूर्खतापूर्ण सवाल' पूछे

Sunday, August 26, 2018

达沃斯论坛探讨落实气候行动

年一度的世界经济论坛 ( )于今日在瑞士滑雪胜地达沃斯开幕。此次论坛将为各国政府和企业提供一个探讨如何将巴黎气候协议付诸实践的机会。

会议的召开适逢世界面临全球变暖威胁之际,世界经济论坛上周发布的一篇报告显示,粮食安全及气候变化是商业精英最关注的问题之一。

联合国气候大会主席克里斯蒂·菲格雷斯周三上午在世界经济论坛专题讨论会上说道:签订《巴黎气候协议》只是"容易的环节",现在的任务是加快世界能源体系转型的步伐。

政商两界领导人
齐聚一堂,恰逢石油价格滑落至近十年最低点,新兴经济体发展日益趋缓。石油、煤炭、铁矿石等主要大宗商品需求疲软、供应过剩的现状让各国政府再一次意识到,化石燃料和能源密集型自然资源将是一个越来越不确定的因素,并有可能危及未来的规划和预算。

三上午的专题讨论会就化石燃料价格走低将会在何种程度上阻碍可再生能源和电动汽车的发展进行了辩论。在最近的这次油价暴跌之前,可再生能源和电动汽车已经逐渐可以与化石燃料相抗衡。

年年底,随着汽油价格的下滑,美国电动汽车的销售出现停滞,而高油耗汽车的需求却大幅增长。

源专家表示,由于中国、欧盟和美国等国政府采取碳交易、税收等激励措施鼓励从汽油发动机和化石燃料发电向低碳转型。因此,长期来看,这些国家和地区对于石油和煤炭价格的下跌有足够的耐受力。

时,新技术带来的机遇日益显现,如大容量电池、蓄能设备、并网效率提升、自动化程度提高等。在达沃斯会议上,与会者思索“第四次工业革命”将会给劳动力、城市、以及能源生产和存储的方式带来怎样的影响。

保主义者常嘲讽达沃斯会议不过是那些只会夸夸其谈的全球精英们展示口才的地方。但除了联合国气候峰会,能让世界银行和联合国这种多边机构与世界最大的企业和数十名国家领导人就如何解决包括气候变化问题在内的全球性问题会谈的机会并不多。今年的会谈结果,仍需拭目以待。

Friday, August 17, 2018

#MeToo之后:改善中国环保界性别平等现状

#MeToo运动近期相继在中国的学术界、公益界和媒体界爆发,用残酷的事实展示了工作场合性骚扰、性侵犯的普遍性。人们批判施暴者漠视道德准则和他人尊严,呼吁尽早建立预防和惩罚性骚扰的有效机制。

被曝光的性侵行为往往发生于掌握权力的男性和处于弱势的女性之间(如男记者与女实习生、男性机构负责人与女志愿者),凸显出职场乃至整个社会中存在着基于权力不平等的侵害行为,环保公益领域也不例外。因此,反对性骚扰只是一个开始。女性的诉求不应止步于获得保护,她们需要更主动地、更全面地参与到追求性别平等、重塑权力结构的进程中。

环境领域的性别不平等

性骚扰事件可谓是性别不平等的极端体现,其实职场中还存在许多看似更“温和”的问题。环境领域的工作者对这些现象一定不觉得陌生:大大小小的会议上,在台上侃侃而谈的多是男士,虽然研究相同议题的女性并不罕见(国际上,这被形象的称为manel,既all-male panel);环境新闻报道中更多引用的是男性专家的观点和意见;在很多环保机构中,尽管总体上女性员工更多,但管理层还是以男性为主。

这一类的问题不以暴力的形式出现,但却会系统性的限制女性职业发展、固化男性主导的权力结构。很多人觉得上述现象司空见惯,其实也是默许了性别不平等的事实。

环保组织的工作往往希望对外界产生影响。因而,内在的性别权力失衡会随着工作的开展产生外部影响。比如,政策制定本应吸收多方意见,如果参与讨论的总是固定的一群人且男性居多,最终推出的政策很可能无法有效反映女性的利益诉求,从而又进一步强化了男性主导的局面。而事实上,女性往往更易受环境污染和气候变化影响,她们的诉求本该成为政策和项目设计的重点。虽然女性也完全可以是男权、父权的维护者,但增加女性发声机会和女性领导者的数量仍不失为弥补两性权力差距的良方。

现在就可以开始改变

丑闻曝光之后,众多国内公益机构就公开做出了反性骚扰承诺,这样的快速回应也给人以希望。毕竟,比起受体制严格束缚的政届、商界和学术界,NGO行业更具备发生变革的基础和潜力。

提高女性话语权和影响力是一个复杂、缓慢的过程,但已经有人开始采取一些切实可行的行动。比如,让女性专家的观点和声音更多的出现在媒体报道中。例如,NüVoices团队就搜集整理了一份研究中国问题的女性专家名单,包含专家们的专业领域和联系方式。这份名单免费供其他记者使用,以鼓励同行将更多女性声音纳入报道。不过,这份名单上中国籍的女性专家仍是少数,可以做进一步的扩充。针对中文媒体工作者,类似的名单和倡议也值得推广。

再比如,在各类会议上为女性参与者提供更多的发言机会,杜绝“全男性论坛”(manel)现象。在环境领域工作的女性众多,只要能将性别平等作为组织会议的一项基本原则,这一点应该不难实现。在具体操作上,欧洲同仁的做法可资借鉴:旨在提高欧盟政策讨论中性别多样性的倡议 已经编写了一份指南,不管你是会议组织方还是参会嘉宾,你都可以在指南里了解到如何以自身的行动提高会议中的性别平等。

更大胆一些…

爱尔兰前总统Mary Robinson和爱尔兰喜剧演员Maeve Higgins于近期启动的一个新项目提出了比单纯的“平权”更具雄心的想法。这个名为“创造之母”(Mothers of Invention)的倡议计划通过播客的形式,讲述全球各地女性应对气候变化的行动。她们认为气候变化问题有其更深刻的根源:“父权资本主义制度将不会解决气候变化问题,而我们需要去。”

性别平等并不是要在现有体制下与男性“争权”,而是要彻底改变父权制的格局,建立一套女性主义的治理和行为模式。具体到环境议题上,就像Mary Robinson所说:“由人类活动引发的气候变化需要女性主义的解决方案”。这个思路也适用于中国所面对的众多环境挑战。

Wednesday, August 15, 2018

मैंने 'लिव-इन रिलेशनशिप' का बच्चा क्यों पैदा किया

जब प्यार हुआ तो इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा कि वो ना मेरे देश का था, ना मेरे मज़हब का, ना मेरी जाति का. पर अब हमारे लिव-इन रिलेशनशिप को टूटे एक महीना ही हुआ था और मैं उसके बच्चे की मां बननेवाली थी.
मेरे सारे दोस्तों को लग रहा था कि मैं पागल हो गई हूं क्योंकि मैं, 21 साल की कुंवारी लड़की, ये बच्चा रखना चाहती थी.
मुझे भी ऐसा ही लग रहा था कि मैं पागल हो जाऊंगी. मन ऐसा घबरा रहा था जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला है. पर जो बुरा होना था वो तो हो चुका था.
मैं 19 साल की थी जब मुस्तफ़ा से मिली. उत्तर-पूर्व के अपने छोटे से शहर को छोड़कर मैंने देश के दूसरे सिरे में एक बड़े शहर में कॉल सेंटर में नौकरी करनी शुरू ही की थी.
मुस्तफ़ा अफ़्रीकी मूल का था. वो 'टॉल, डार्क ऐंड हैंडसम' वाली कैटिगरी में फ़िट बैठता था. उसमें 'स्वैग' था. मेरा जवां दिल उसकी तरफ़ खिंचा चला गया. एक-डेढ़ साल की दोस्ती और के बाद हमने साथ रहना शुरू कर दिया.बीसी कीविशेष सिरीज़ #HerChoice12 भारतीय महिलाओं की वास्तविक जीवन की कहानियां हैं. ये कहानियां 'आधुनिक भारतीय महिला' के विचार और उसके सामने मौजूद विकल्प, उसकी आकांक्षाओं, उसकी प्राथमिकताओं और उसकी इच्छाओं को पेश करती हैं.
मैं क्रिश्चियन हूं और वो मुसलमान. हमें एक दूसरे से प्यार भी था लेकिन शादी की बात सोचने की हिम्मत दोनों में ही नहीं थी.
पता नहीं क्यों, मुस्तफ़ा के मन में शक़ घर करने लगा. उसे लगता था कि मेरा उसके दोस्तों के साथ अफ़ेयर है और इस बात को लेकर हमारी लड़ाइयां होने लगीं.
धीरे-धीरे ये इतनी कड़वीं हो गईं कि हमारे दिन एक दूसरे पर चीखते-चिल्लाते बीतने लगे. आख़िर हमने ब्रेकअप कर लिया.
मैंने तय किया कि वापस घर जाऊंगी. अपने इस छोटे से अपार्टमेंट और उसके साथ जुड़े अनुभवों से दूर जाना चाहती थी.
लेकिन मेरी सारी प्लानिंग फेल हो गई जब उस महीने मेरे पीरियड्स नहीं आए. पास की एक दुकान से 'प्रेगनेंसी टेस्टिंग किट' लेकर आई तो मेरा डर सही साबित हुआ. रिज़ल्ट 'पॉज़िटिव' था.
मुस्तफ़ा के साथ रहने के बाद ये दूसरी बार था कि मैं प्रेगनेंट हुई थी. पहली बार उसके दबाव में मैंने अबॉर्शन करवा दिया था. पर इस बार...
मैंने मुस्तफ़ा को फ़ोन कर एक कैफ़े में बुलाया. आमने-सामने बैठ जब उसे बताया तो मुझ पर ही चिल्लाने लगा, कि मैंने सावधानी क्यों नहीं बरती.
उसने मुझे सैकड़ों वजहें गिनाई और बच्चा गिराने के लिए मनाने की कोशिश की. ये तक कह डाला कि वो यक़ीन कैसे कर ले कि बच्चा उसी का है!
लेकिन मैंने ज़िद पकड़ ली थी. जब पहला बच्चा गिराया था तो लगा था कि जैसे मैंने किसी का ख़ून किया है.
दोबारा अपने ही बच्चे का ख़ून करने की हिम्मत मुझमें नहीं थी. ऐसा नहीं कि मुझे डर नहीं लग रहा था. मेरे तो आंसू रुक ही नहीं रहे थे.
मैं शादीशुदा नहीं थी और न ही मेरे पास कोई अच्छी नौकरी थी. बच्चे का बाप तो उसे अपना मानने को तैयार तक नहीं था.
लेकिन साथ ही ऐसा भी लग रहा था कि भगवान शायद मुझे मौक़ा दे रहा है एक नई ज़िंदगी शुरू करने का.
अब तक मैं एक लापरवाह युवा की ज़िंदगी जी रही थी, सबको शक़ था कि मैं एक बच्चे को नहीं पाल पाऊंगी.
मुझे भी मालूम था कि मेरा रास्ता आसान नहीं है पर अब मेरे पास ज़िम्मेदार होने की एक वजह थी. मेरे अजन्मे बच्चे का प्यार मुझे उसे इस दुनिया में लाने को कह रहा था.
मैंने डरते-डरते अपने परिवार को इस बारे में बताया. उन्हें मुस्तफ़ा के बारे में पहले से पता था लेकिन मेरी प्रेगनेंसी की बात सुनकर वो बहुत गुस्सा हुए.
वो इस बात से उतने नाराज़ नहीं थे कि मैं शादी से पहले मां बनने जा रही हूं. बल्कि इससे कि वो बच्चा एक काले, विदेशी और उनकी जाति के बाहर के लड़के का था.
मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं सब कुछ ख़ुद संभाल लूंगी. उन्होंने भी दोबारा मदद के लिए नहीं पूछा.
अपना ख़र्च चलाने के लिए मैंने एक दुकान में सेल्स गर्ल का काम करना शुरू किया. इस बीच, मुस्तफ़ा ने मुझे मनाने की कोशिशें ज़ारी रखीं पर मेरा फ़ैसला पक्का था.
डिलिवरी वाले दिन मेरी दोस्त मुझे स्कूटी पर बैठाकर हॉस्पिटल ले गई. एक घंटे बाद सिज़ेरियन ऑपरेशन से मेरे बच्चे का जन्म हुआ.
जब मुझे होश आया तो बच्चा मेरी दोस्त की गोद में था और डॉक्टर मेरे पास खड़ी मुस्कुरा रही थीं. मैं बहुत ख़ुश थी. लग रहा था सब ठीक होने वाला है.
शाम को मुस्तफ़ा भी हॉस्पिटल आया. उसने बच्चे को गोद में उठाया और अपने दोस्तों को फ़ोन करके बताया कि वो एक बेटे का पिता बन चुका है.
मुस्तफ़ा को इतना खुश देख मैं हैरान रह गई. पर वो अब भी अपने परिवार को इस बारे में बताने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था.
उसने दोबारा रिश्ता शुरू करने की बात कही. वो बच्चे को मुस्लिम नाम भी देना चाहता था. लेकिन मैंने इनकार कर दिया और अपने बच्चे को क्रिश्चियन नाम दिया.
मैं मुस्तफ़ा पर भरोसा नहीं कर पा रही थी. कुछ दिनों बाद मेरी मां और कज़िन भी मेरे पास आ गए. अब मैं अकेली नहीं थी.
अगले साल मुस्तफ़ा भारत से अपने देश लौट गया और फिर मेरी ज़िंदगी में कभी वापस नहीं आया.
अब मैं 29 साल की हूं और मेरा बेटा छह साल का होने जा रहा है. ये व़क्त बहुत मुश्किल था पर उसे बड़ा करते-करते मैं और निडर हो गई हूं.
हम सपनों की उस दुनिया में जी रहे थे जहां आगे की ज़िंदगी के बारे में कुछ भी सोचना बेमानी सा लगता है. उसके बहुत से दोस्त थे जो हमेशा हमारे घर आया करते थे. मैं भी उनसे खुलकर हंसती-बोलती थी.

Wednesday, July 25, 2018

中欧能否携手推进南极保护

周举行的中国-欧盟领导人会晤中释放出了一个积极的信号,中国在建立新的南极海洋保护区(MPAs)问题上的态度或许正逐渐改变。欧盟虽未制定南极政策,但其自2012年以来一直提议在南大洋海域建立海洋保护区。
欧盟一直与澳大利亚合作,致力于推动在南极洲东部建立新的海洋保护区;此外,自2016年以来,欧盟还一直主张在威德尔海建立海洋保护区网络。
但这些提案遭到了南极海洋生物资源保护委员会( )内中国和俄罗斯的强烈反对。该组织由24个成员国及欧盟组成,共同管理南极洲水域。
然而,最近在北京召开的中国-欧盟领导人会晤上,中欧首次签署协议,建立海洋蓝色伙伴关系,旨在加强国际海洋治理
问题是,欧盟与中国能否借助该伙伴关系,成功携手推进南极保护的进程?
欧盟或与南极相隔较远,但自20世纪初人类开始探索南极时起,英国和法国就 一直是积极的参与者。
两国还与欧洲经济区成员国挪威一道,宣布对该南极大陆享有主权,并密切参与欧盟的决策进程。
欧盟在南极治理机制中,特别是南极条约体系(ATS)的制定过程中也发挥着重要作用。 欧盟的28个成员国中有12个为ATS的协商国,这意味着根据《南极条约》中“开展大量研究活动”的规定,它们在决策中拥有一定的投票权。另外还有8个欧盟国家则是ATS的非协商条约缔约国。
欧盟在2012年南极海洋生物资源保护委员会会议中正式提出在南极洲东部建立海洋保护区。同期,美国和新西兰也提出在罗斯海建立海洋保护区。
可是,目前全球最大的罗斯海海洋保护区已于2017年设立,但在南极洲东部海域设立保护区的提议仍在谈判之中,欧盟提议的威德尔海保护区也是如此。
反对欧盟提议的成员国有中国和俄罗斯。对中国来说,反对这一提议的主要原因是担心失去在南大洋的捕捞权

中欧合作

那么欧盟和中国是否有望共同推进南极海洋保护区的建立?现在下结论还为时尚早,但双方达成中欧海洋伙伴关系释放出了积极的信号,意味着在不久的将来,欧盟建立新的海洋保护区的提议可能会得到中方的支持
必须指出的是,海洋问题上的合作是中欧关系中一个相对较新的领域。当前合作领域集中于贸易、投资、气候变化和人权等方面。
例如,在2013年第十六次中国-欧盟领导人会晤期间发布的《中欧合作2020年战略规划》(2020规划)中,海洋合作(第六部分)中仅指出:
“加强在海洋综合管理、海洋空间规划、海洋知识、海洋观测与监测、海洋科技研发、海洋经济发展、海洋能源利用方面的交流与合作。”
2016年,欧盟通过了一项新的中国战略。该战略侧重于在南海建立规范的国际秩序,以及消除非法、未报告和无管制(IUU)的捕捞行为。
直到2017年召开的第十九次中国-欧盟领导人会晤中,双方才同意建立侧重于海洋管理和蓝色经济的“蓝色伙伴关系”,即所谓的“中国-欧盟蓝色年”。
这为2018年欧盟-中国海洋伙伴关系的建立奠定了坚实的基础。该伙伴关系将“保护南极海洋生物资源”作为未来合作的一个领域

灵活性

中国将极地地区视为新的战略前沿。但不同于台湾和南海这些核心利益地区,中国外交在此类新的前沿领域中表现出了更大的灵活性与协作性。
就拿2017年11月通过的《防止中北冰洋不管制公海渔业协定》来说,在该协定谈判过程中,欧盟与中国都发挥了积极的作用
欧盟或许可以从罗斯海海洋保护区的设立中汲取到这样的经验:美国将中国和俄罗斯视为重点外交对象。在自上而下的体制下,下级中国政府官员会以更加严肃认真的态度对待高层领导同意的问题。
中-欧领导人会晤期间,欧盟领导人与中国总理李克强和习近平主席共商南极海洋保护区的问题。双方达成的共识在中国—欧盟海洋伙伴关系中得到了充分的体现,而欧盟委员会与中国新成立的自然资源部则为该伙伴关系的重要合作方。
即将于2018年10月在澳大利亚霍巴特举行的CCAMLR年会上,中国代表团可能会在这一问题上做出进一步的表态。
至少,欧盟—中国海洋伙伴关系的建立使南极海洋保护区的建立朝着积极的方向发展。